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मिले मुझसे मुसाफिर कई इस सफर में, पर समझना किसी ने भी न चाहा 
हर वो रिश्ता उलझता ही चला गया, जिसे मैंने जितना सुलझाना चाहा 
लगा दिया गया selfish का tag मुझपर, पर मैंने सबको बेवजह ही चाहा 
पता नहीं बुरा मैं हूँ या मेरी किस्मत, पर हमेशा मैंने सबका भला ही चाहा |

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