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तूने हमेशा आने में देर कर दी मुर्शद.. 
मैनें तो हमेशा अपनी घड़ी को खराब समझा।

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मन से उतरे हुए लोग, सामने भी बैठ जाए तो नज़र नहीं आते....
 मै गुल्लक तोड़कर वापस गया जब,  वो गुडिया और मंहगी हो गई थी...